दहेज प्रथा  मूल रूप से विवाह के आयोजन के समय  दूल्हे तथा उसके माता पिता को दुल्हन के परिवार द्वारा दी जाने वाली नगद रूपए , सोने तथा चादी के आभूषण, मंहगे फर्नीचर, टीवी कार मोटर-बाइक संपत्ति जेसी चीजें हैं 
जो दहेज प्रथा प्रणाली कहा जाता है, यह प्रथा भारत में सदियों से चली आ रही है , ये केंसर से भी जल्दी अपना असर दिखाना शुरू कर देती है।

दहेज प्रथा हमारे समाज में सबसे बुरी प्रथाओं में से एक माना जाता  है। कहा तो यह भी  जाता है की यह मानव सभ्यता जितनी पुरानी है तथा देश-दुनिया भर के कई समाज के वर्ग में बट्टा हुवा  है। 

Dahej Pratha Par Nibandh Short Essay In Hindi 200 Words | 
दहेज प्रथा पर निबंध 200 शब्दों |

दहेज प्रथा शादी  के समय दुल्हन के माता पिता द्वारा दूल्हे के परिवार को दी जाने वाली बड़ी संख्या में नकद रूपए एवं सोने चादी के  गहने तथा कार मोटर बाइक के साथ अन्य  साजो सामान के उपहार देने मजबूर करती है दहेज़ प्रथा।यह प्रथा हमारे देश में दहज प्रथा एक कारण के लिए रखी गई थी, कुछ दशक पूर्व  पहले  लड़कियों का उनकी पैतृक संपत्ति तथा अन्य अचल संपत्तियों पर किसी भी प्रकार से कोई अधिकार नहीं होता था लड़की को उसकी शादी के समय ही नकदी रूपए ,  सोने के आभूषण तथा अन्य  साजो सामान जैसे चीजे संपत्ति के रूप में दे दी जाती थी उसके उचित हिस्से के हिसाब से हालांकि यह प्रथा कब समाज में दहज  के रूप में तप्दिल हो गई और एक बुरी सामाजिक व्यवस्था में बदल गई ।
 
सभी माता पिता अपनी बेटी को दहेज के रूप में कुछ ना कुछ देने की इच्छा  रखते हैं, ताकि उनकी बेटी भी नई जगह पर जाकर खुद से आत्मनिर्भर बन सकें। जादातर मामलो में दुर्भाग्य पूर्ण यह है की दूल्हे के परिवार द्वारा दहेज़ की माग राखी जाती है,कुछ समय  पहले यह दुल्हन के माता पिता का एक स्वैच्छिक निर्णय हुवा करता था,  आज से ज़माने में यह प्रथा उनके लिए एक दायित्व का हिसा बन गया है।

शादी होने के बाद में पर्याप्त दहेज नहीं लाने के लिए लड़की को शारीरिक तथा मानशिक रूप से बहुत प्रताड़ित  किया जाता है, ऐसे कई मामले हमारे सामने टीवी और न्यूज़ पेपर के दुवारा आते रहते  हैं।  बहुत से मामलों में दुल्हन अपने परिवार से अपने ससुराल वालों की मांगों को पूरा करने वाली एक नोट छापने वाली मशीन बन जाती है, बहुत से लोग नई दुल्हन को इतनी यातना देते है की वो अपनी जान तक दे  देती  हैं। अब समय आ गया है की सरकार और समाज को मिलकर  इस कुप्रथा को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरुरत है।

dahej pratha ek abhishaap par nibandh 300 words |

दहेज प्रथा प्रणाली जिसमें दूल्हे के परिवार को नकद रूपए एवं दूल्हे के परिवार के लिए उपहार के रूप में कुछ मंहगे सामान देना भी शामिल है | हमारे समाज के द्वारा दहेज प्रथा की काफी हद तक निंदा भी की जाती है, हालांकि यहाँ पर कुछ लोगों का तर्क यह भी है की दहेज प्रथा के अपने फायदे भी हैं लोग इस प्रथा का अनुसरण केवल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यह दुल्हनों के लिए उनके महत्व को रखें हुवे है उन्हें कुछ तरीकों से यह प्रथा लाभान्वित भी करती है ।

दहेज प्रथा का दम्पति जीवन में कोई लाभ हैं ?

आज के समय में बहुत से दम्पति स्वतंत्र रूप से रहना पसंद करते हैं, तथा  यह कहा जाता है की दहेज के रूप में ज्यादातर नकद रूपए , मंहगे फर्नीचर, कार-बाइक तथा ऐसी अनेको संपत्ति दहेज़ में शामिल हैं, जो उनके लिए एक वित्तीय सहायता के रूप में कार्य करती है तथा उनको एक अच्छे  मजबूत आधार सीला  पर अपना नया जीवन शुरू करने में सहायता प्रदान करती है।

जैसा ही  नव दम्पति जीवन की शुरुवात दूल्हा और दुल्हन दोनों ने ही अपने करियर की शुरुआत की नीव रखी है तो वों आर्थिक रूप से वे इतने संपन नहीं हैं की  वे एक साथ इतना बड़ा खर्च उठा सकते ये पर क्या यह एक ठोस कारण है दहेज़ प्रथा होने का  और यदि ऐसा है तो दोनों परिवारों को साथ मिलकर मदत करनी चाहिए ना की दुल्हन के परिवार पर पुरा बोझ थोप देना चाहिए इसके बजाय उनकी गृहहस्ती बसाने में दोनों के माता पिता ने आपसी सहयोग करना चाहिए ना लड़की के परिवार को परेशान करना ।

दहेज़ प्रथा के बजाये यह होना चाहिए अगर लड़के का परिवार कर्ज में डूबे हुए या फिर लड़की वाले चाहे तो अपने जीवन स्तर को कम किए बिना नवविवाहितों जोड़े को वित्तीय सहायता देने की पेशकश कर सकते हैं। कई बार यह भी तर्क दिया जाता  हैं की जो लड़कियां अच्छी तथा सुन्दर नहीं दिखती हैं, वे लड़के के परिवार की वित्तीय मांगों को पुरा करके एक अच्छा वर अपने लिए चुन सकती है,ऐसे मामलों में एक बड़े भारी दहेज का लेनदेन किया जाता है दहेज़ प्रथा उन सभी लोगों के लिए एक वरदान के रूप में जन्म लेती है जो अपनी बेटियों के लिए वर (खरीदने) में आर्थिक से सक्षम हैं। आज समाज में सबसे यह दुर्भाग्य-पूर्ण बात है की लड़कियों को आज भी एक बोझ ही समझा जाता है | 

दहेज प्रथा के ठेकेदार यह भी कहते हैं की दूल्हे तथा उसके परिवार एक बड़ी मात्रा में उपहार देकर हम दुल्हन की स्थिति को दुल्हे के घर में मजबूत कर सकते है ताकि उनकी बेटी को ससुराल में कोई भी तकलीफ ना हो। हालांकि आजतक आंकड़े हमें बताते हैं की ज्यादातर केस में यह लड़कियों के विपरीत ही काम करता है  जिसका इनाम लड़की मोत होती या फिर उसको जला कर मर दिया जाता है ।

दहेज़ प्रथा पर निष्कर्ष |

दहेज प्रथा समाज का वो अनदेखा पहलू है जो हमें दिखाई नहीं देता है पर ये बहुत ही दर्दनाक होता है , जो परिवार दहेज़ देने में सक्षम नहीं होते उनको समाज में बहुत तकलीफों का सामना करना होता है , उनकी बेटी की शादी नहीं होती है अगर गलती से हो जाती है तो जादा दिन वो जिन्दा नहीं रह पाती है , या तो उसे जलाकर मार दिया जाता है या फिर उसे इतना प्रतारित किया जाता है की वो अपनी जान खुद ही दे देती है | अगर लड़के की सरकारी नोकरी है तो उसकी कीमत भी लड़की के घर वालो से ली जाती है |